अफ़साने तस्सवुर

क्या बताऊँ…
तुम्हारी याद में
लिखने की फितरत कैसी है?
तेरी याद आते ही
हाँथ चल पड़ते हैं
अफ़साने तस्सवुर लिखने को
लाख रोकना चाहूँ
पर नहीं रुकता
तेरी अदाएं हीं ऐसी है
तेरी यादें हीं ऐसी है
तू दस्तक देती है मेरी ज़ेहन में
क्योंकि
तू घुल गयी है यूँ हवाओं में
लाख रोकना चाहूँ
तो भी न रोक पाऊँ
क्योंकि इसकी फितरत ही ऐसी है….
क्या बताऊँ तुम्हारी याद में
कैसे, क्या और कितना लिख देता हूँ
अपने हल-ए-दिल
क्यों की दिल में
तेरी याद की लहर सी उठती है
और मुझे भिगोती है
इसीलिये तुम्हारी याद में
अफ़साने तस्व्वुर लिखता रहा हूँ…..

3 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 10/07/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/07/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/07/2018

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