जब दर्द फिसल कर….

जब दर्द फिसल कर उतरने लगते हैं पन्नो पे
तब कर्ज़दार हो जाते हैं मेरे ये कलम,
उन्हें आए दिन स्याहियां जो उधार लेनी पड़ती हैं .
“Copyright” © ( नितेश बनाफ़र )

5 Comments

  1. Abhishek Rajhans 09/07/2018
    • nitesh banafer nitesh 13/07/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/07/2018
    • nitesh banafer nitesh 13/07/2018
    • nitesh banafer nitesh 13/07/2018

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