ठंढ़ी हवा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ठंढ़ी हवा है काली घटा है
मस्त फिजाँ है झूम झूम झूम ।

झूम रे बंधु झूम झूम झूम

झूम रे साथी झूम झूम झूम।।

ये मन मौजी चाल है चलता
बादल का चंदा गाल है मलता।
रिमझिम बूंदे चूम चूम चूम
वाह रे साथी झूम झूम झूम ।।

खड़ी अंगड़ाई लेती पुरवाई
सनन सनन से हर्षे अमराई ।
सावन भीजो घूम घूम घूम
वाह रे साथी झूम झूम झूम ।।

बरसे सावन कितना मनभावन
मद मस्त पवन ये कितना पावन।
पैजनियाँ बाजे छूम छूम छूम
वाह रे साथी झूम झूम झूम ।।

भीजे जब गोरी तो मनवां हर्षे
रह रह जियरा काहे को तरसे।
दिल को करले जूम जूम जूम
वाह रे साथी झूम झूम झूम ।।

One Response

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 09/07/2018

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