दूभर जीना हो गया रहना हुआ दुश्वार – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

दूभर जीना हो गया रहना हुआ दुश्वार
हर जगह स्वार्थ है हर जगह तिरस्कार ।

कुछ योगी भोगी बने साधू बन गये चोर
बातें नेकी की करते करते नहीं उपकार।

विश्वास कहाँ अब रहा फूंक कर रखना पाँव
जहाँ भी जाके देख लो हर जगह अत्याचार।

भाई भाई जल रहा दोस्त ले रहा जान
रिश्ते नाते  छूट रहे सब जगह तकरार ।

लुप्त ये मानवता संस्कृति सभ्यता समाज
धीर कहाँ किसमें रहा कहाँ गया संस्कार

इंसानियत ये मौन है देख परख कर आज
हालत बुरी सी हो गयी जनता सब लाचार।

हेरा फेरी कर रहा जहाँ भी मिलता घात
आतंकी का मन बिगड़ा कैसा यह किरदार।

लेखनी ही  आंदोलन है कर लो जिंदाबाद
जन जन में ताकत भरे कलम यही तलवार।

बन गया बहरा ‘बिन्दु’ कानून अंधा देख
अत्याचार अपहरण जहाँ तहाँ बलात्कार।

2 Comments

  1. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 07/07/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 07/07/2018

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