तेरी शह नहीं पाते – शिशिर मधुकर

मुहब्बत तुमसे है इतनी तेरे बिन रह नहीं पाते
बात दिल में हज़ारों हैं मगर हम कह नहीं पाते

ज़माने ने किया मज़बूर न हों नज़दीकियां तुम से
मगर ये दूरियां सच में कभी हम सह नहीं पाते

अटल है प्यार मेरा भी बड़ी चट्टान के जैसा
कहे सैलाब कितना भी मगर हम बह नहीं पाते

तोड़ देंगे सभी बेड़ी ज़माने ने कसीं हैं जो
मगर हम क्या करें जब कोई तेरी शह नहीं पाते

लाख तूफ़ान आते हैं और धरती भी हिलती है
किसी पर्वत सरीखे मधुकर मगर हम ढह नहीं पाते

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 05/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/07/2018
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 06/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/07/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/07/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/07/2018

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