आज नहीं

जब आसमान
रंग -विरंग बादलों से सजे रहेंगे
सूरज के सामने
नहीं रहेगा धुंध
पेड़-पौधों में हरियाली रहेगा
और सुख-शांति की बातें करेंगे
जिस दिन की सुबह
हर्ष और आरामवाली होगी
अख़बारों में किसी तरह की
बुरे खबर नहीं रहेंगे
घोसले की कबूतर भी
बिना डरे गुंटूर-गू कर सकेंगे
छज्जे की गरैया भी
खुशी से नाच सकेंगे
आम की डाली से
कोयल गायेगी
पहाड़ी घाटी में
बांसूरी सुनाई देगी
बच्चे भी पीठ की भर भूलकर
मैदान में खेलेंगे
जिस दिन पहाड़ जैसा नहीं
रुई के जैसा हल्का होगा
दोस्त उसी दिन मिलने आना
कदम की वृक्ष तले
पर आज नहीं ……

3 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 23/06/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/06/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 25/06/2018

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