मैं मेरा

मैं ,मेरा

मैं और मेरा सताये बहुत
उम्मीदें भी जगाये बहुत
कभी २ रुलाये बहुत
मुक्ति कैसे पा सकते हैं

कोई सोच ख़ुद से अलग नहीं
इस से बड़ी कोई ललक नहीं
प्यारी इससे कोई झलक नहीं

मैं मेरे से जब हम जुड़ जाते हैं
न जाने क्या क्या हम सह जाते हैं
अर्थ जीवन का भी इसी से है
हर पकड़ भी जीवन की इसी से है
शिकवे शिकायतें भी इसी से हैं
अहंकार और गर्व भी इसी पे है

बिन इसके कोई बोल नहीं
अस्तित्व का भी तोल नहीं
जीवन से बड़ा कोई मोल नहीं

बदल जाए जो-मैं-तू ही तूं में
फिर नहीं रहेगें हम कश्मकश में
मैं मेरे से होकर मुक्त
जा पहुँचेंगे हम प्रभु चरणन में

परिभाषा सुख दुख की बदल जाएगी
निराशाओं से मुक्ति मिल जाएगी
आशाओं की बारिश भी थम जायेगी

है अति सुन्दर पर इक जाल सलोना
निकलना मुश्किल तो होना ही होना

पर

है रासता मुक्ति का बेमिसाल
विश्वास प्रभु का करे कमाल
छोड़ अहम को हो जाएँ मुक्त
फिर कैसे रहे मन में कोई मलाल

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/06/2018
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/06/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/06/2018
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 22/06/2018

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