न मैंने ख्वाब देखा हैं न मैंने दिल लगाया है (ग़ज़ल काव्य)

न मैने ख्वाब देखा हैं न मैने दिल लगाया है
हक़ीक़त जान कर मैंने मुहब्बत को भगाया है

बड़ी बेकार है इसकी पकड़ तुम हात ना आना
बड़ी बेख़ौफ़ है इसने निगाहों को ठगाया है

करो कोशिश रहें बचके न इसके साथ जा पाए
बड़ी शिद्दत भरी आवाज में ये गीत गाया है

न जानें याद क्यों ऐसे रुलाएं जान ना पाया
बिना बारिश नहाएं जो निगाहों ने भिगाया है

अचानक सामने गुजरा न जाने कौन साया था
मगर जाते हुए दिल में मुहब्बत को जगाया है

शशिकांत शांडिले, नागपुर
भ्र.९९७५९९५४५०

7 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 21/06/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/06/2018
      • C.M. Sharma C.M. Sharma 22/06/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/06/2018

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