मेरे पिता

वो चुपचाप ,शांत सा दिखने वाला इंसान
मेरे लिए मेरे सपनो का पूरा आसमान
चेहरे पर झुरियां आ गयी है जिसके
बाल कुछ पके -कुछ अधपके से
वो पिता है मेरे
उनके नाम से है मेरी पहचान

मेरे पिता मेरे लिए
हैं ईश्वर या ईश्वर का वरदान
मैं गर्व उनका सदा बनूँ
मैं उनके उम्मीदों के पंख से परवाज करूँ
वो करे हमेशा मुझ पर अभिमान
कुछ ऐसा करूँ पहचान निर्माण

मेरे पिता ने कुछ माँगा नहीं मुझसे
हमेशा दिया हैं
मेरी खुशियों ,मेरे सपनो को
अपने आँखों से जिया है
मेरी चाहतो को
मुझसे पहले जाना है.

मेरे पिता मेरे लिए
मेरे हिम्मत की तलवार है
मेरे दुश्मनों के सामने खड़ा
एक अभेद दीवार है
वो इस दुनिया में
मेरे लिए मेरा भगवान् है —-अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 18/06/2018
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 20/06/2018

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