आज मैं क्या लिखूँ

शीर्षक — आज मैं क्या लिखूँ
कल रात कैसे गुजारी मैंने
क्या मैं वो बात लिखूं
तुमसे जो हो ना पायी
क्या मैं वो मुलाकात लिखूं
अपने सारे जज्बात लिखूं
तो सुन भी लो अब-
सिसक रही थी मोमबतियाँ
खुद को जलाकर
आँखों ने सोने ही ना दिया
आँखों से अश्क बहा कर
तकिये बेचारे भींगते रहे
तेरे इंतज़ार के दर्द से
तेरे इंतज़ार में खुले रहे दरवाजे
और खुली रही खिड़कियाँ
तुम्हारे बिना
तारो का टिमटिमाना भी रास ना आया
चाँद अपनी महफ़िल जमाये बैठा था
तुम्हारे बिना उसने भी खुद को बादलो में सिमटा लिया
मयखाने का बोतल भी था
पर तुम्हारे दर्द का नशा उतार ना पाया—अभिषेक राजहंस

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  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 11/06/2018

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