शांति की कविता

आसमान में जब
गुस्से का आग जल उठेगा
जब खेत में उगेगा
बोमा,बारूद और बन्दुक
हवा में रहेगा विष
धर्म दो रूपया भाव से बिकेगा
मानवता खून से लतपथ होकर
सड़क पर पड़े रहेंगे
जब चारों ओर
डरावना परिवेश रहेगा
तब झाड़ी में छुपी
फूल जैसी शांत न रहो
तीर की तीक्ष्ण फैला जैसी
अपनी लेखनी को धार दो
और
लिखो सुख -शांति की
कविता

One Response

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/06/2018

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