चँदन के चहला मेँ परी परी पँकज की पँखुरी नरमी मैँ

चँदन के चहला मेँ परी परी पँकज की पँखुरी नरमी मैँ ।
धाय धसी खसखानन हाय निकुँजन पुँज भिरी भरमी मैँ ।
त्योँ कवि दत्त उपाय अनेक किए सिगरी सही बेसरमी मैँ ।
सीतल कौन करै छतियाँ बिन प्रीतम ग्रीषम की गरमी मैँ ।

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