जाते हो तुम

जाते हो तुम
ठीक है जाओ
जाते जाते सुनती जाओ
मेरे दिल का हाल तो समझ भी जाओ
मेरी ज़िन्दगी के अधूरेपन को तो समझो
कैसे जीऊंगा तुम बिन मैं
मेरी ज़िन्दगी बन भी जाओ
जाते हो तुम
ठीक है जाओ
दर्द जो है सीने में
उसको अब यूँ ना बढाओ
मेरे आँखों में अपने ख्वाब दिखाकर
मुझे देख कर, मुस्कुरा कर
थोड़ा शर्मा कर, थोडा इठला कर
कभी अपने बालो में उँगलियाँ घुमाकर
तुम क्या जतलाना चाहती थी
था प्यार रहा तुम्हे मुझसे
या मुझे तड़पाना चाहती थी
अगर दर्द ही देना चाहती थी
तो दर्द देकर ही जाओ
जाते हो तुम
ठीक है जाओ
ज़िन्दगी तो दे ना सकी
जाते-जाते मेरी साँसे ले जाओ –अभिषेक राजहंस

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