जाने क्या है वो

जाने क्या है वो
मेरे लिए
क्यों नहीं जान पाती वो
क्यों मुझे देखकर मुस्कुराती रहती है
नजरे मिला कर क्यों शरमा जाती है
क्या वही सोचती है वो
जो मैं सोचता हूँ उसके लिए
क्यों क्लास में बैठे -बैठे
अपने बालो को हवा में उड़ाती है वो
क्यों बार बार अपना पल्लू दांतों से चबाती है वो
क्यों मुझे रिझाने के लिए
या फिर तड़पाने के लिए
रोज-रोज संवर कर आती है वो

जाने कैसे बताऊँ मैं
क्या ख़ास है उसके साथ में
उसकी बात में , मुलाकात में
उसके अधरों की हर सरसराहट में
बस जाना चाहता हूँ मैं
उससे उसका दिल
चुरा ले जाना चाहता हूँ मैं
उसे कैसे बताऊँ
उसके छुवन के एहसास में
डूब जाना चाहता हूँ मैं
जो बादल गरजे ,जो मेघ बरसे
उसके साथ भींग जाना चाहता हूँ मैं–अभिषेक राजहंस

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