यही तो प्यार था

वो पहली नजर का प्यार था
आँखों से आँखों का करार था
पता नहीं क्या था
शायद प्यार
हाँ यही तो प्यार था
कॉलेज के कुछ दिनों बाद हीं
नजरो ने ढूंड लिया था नजरो को
समन्दर ने लहरों को
बादलो ने भर लिया था मेघो को
और भींगा दिया था जिस्म को

कुछ दिन बाद ही
उसके जन्मदिन का त्यौहार था
मैं ठिठके कदम से
गया मुबारक देने
उसने थोड़ा मुस्कुरा कर ,थोड़ा शरमा कर
कबूल ही कर लिया था मुझे
उन जादुई लम्हों को
जाने कैसा एहसास था
क्या कोई तिलिस्म था
या कोई सपना था
उसके छुवन ने जगा सा दिया मुझे
अब तो दिल भी बगावत करने को तैयार था
हाँ यही तो प्यार था —अभिषेक राजहंस

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  1. sanjay kumar 08/06/2018

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