गृहिणी………..””””””””””””””””””सविता वर्मा

रूप में रागिनी, मै हूँ गृहस्वामिनी
जो उठा लू कलम तो मैं गजगामिनी
सार्थकता वही,अभिव्यक्ति भी वही
जो तुम में प्रकृति,हममे शक्ति भी वही
फिर किसलिए नही हमारी पहचान है।।
ऐ बता दे आसमां, ऐ बता दे जमीं
आसुओं पर खड़ी क्यों हम नादान है।।

6 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 08/06/2018
    • Saviakna Saviakna 08/06/2018
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 08/06/2018
  3. Saviakna Saviakna 08/06/2018
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/06/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/06/2018

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