माली का कहर

यह कविता पंजाब में फसल कटने के बाद बचे खुचे खेत के तिनको पराली को स्वयं किसान द्वारा ही आग के हवाले कर दिया जाता है के बारे में है।।जिसमें सड़क के किनारे के पेड़-झाड़ियाँ ,नन्हें पौधे,घास,बीज,फूल-फल,घोंसले,छोटे-बड़े लाभदायक जीव सब जल कर राख़ हो जाते हैं ।
जिसका वातावरण पर भयानक असर मौसम बदलते ही दिखाई देता है।
इसी विषय की तरफ इंगित करती रचना प्रस्तुत है ।

माली का कहर
********************
असंख्य कई थे अगल-बगल ।।
माँ के गर्भ में रहे थे पल ।।

जन्म से पहले की बात वो ।
दोनों कुछ नजदीक से कर रहे थे जो ।

देखो भाई मैं बड़ा बनूंगा!
रोशनी से मैं पहले मिलूंगा!
मौसम है गर्म मगर जी उठेगा ।
मेरी कोमलता मासूमियत से
क्यारी का जीवन खिल उठेगा।

पर विधाता! यह कहर था क्या?
किसी ने फेंका ज़हर था क्या!

कुछ तपिश कुछ जलन
मालूम सी हुई थी ।
सुप्त,अनभिज्ञ,अनजान था मैं
अब तक शायद
सच्चाई जाहिर न हुई थी ।

रात्रि बीती हुई सुबह जब
चारों ओर था क्रंदन-शोर ।
न पंछी न सुन रहा कलरव
कैसी मनहूसियत भरी थी भोर ।

धू-धू कर सब साथी मेरे
जल चुके थे,कल बन चुके थे ।

अब न जीवन उनमें शेष था।
जले बदन और राख़ अवशेष था।

दिल धड़का यूँ ज़ोर ज़ोर से
माज़रा सारा समझ में आया ।
माली-जन्मदाता ने मेरे
आंगन में था कोहराम मचाया ।
फसल समेट सब बेच-सहेज
आग लगा मालिक ने मेरे
था कुछ समय बचाया ।
पीड़ियों की हानि न देख
कुछ पलों का स्वार्थी लाभ कमाया ।

उधर कुछ इंच नीचे मैं
तन-मन की गति को थामे
समेटे बैठे कर रहा था मनुहार ।
जीने की रब से लगा रहा था गुहार ।

शायद इंद्र ने किया था तरस !
यूँ थोड़ा-थोड़ा गया था बरस !
अब मैं सजग-सजग !!
कुछ संवर-संवर!!
कुछ डरा-भीगा सा
खड़ा होने को था तैयार

और लो नई थी भोर ।
स्वागत गीत में हुआ था कलरव
शायद सुना था मीठा सा शोर ।

भस्म मंडित शव से
मिल प्रकृति ने शिव बन
खुशहाली के बीज दिए थे बो ।
राख़ से बोझिल ओस की बूंदें
शायद खुशी से दी थी रो ।

रुष्ट हवाएँ अब भी गर्म
दिल का भाव बता रही थी ।
आहें भरती,उजड़े आंगन पर
अफसोस शायद मना रही थी ।

क्रूर कालिमा मंडित सच्चाई से
सबको अवगत करा रही थी ।
कभी शांत -कभी चुप
कभी बिफर-बिफर कर
मानव को थी चेताती !
अरे! कब उठेगा ?
कब जगेगा?
रूठ गई जो प्रकृति कभी
तो मूर्ख कहां राज करेगा?
प्रकृति बिन हे पुरुष!
तू तो धरती को खा जाएगा!
विकास के राकेट चढ़ फिर
बस अंतरिक्ष में ही जा मरेगा।

।।मुक्ता शर्मा ।।

8 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 07/06/2018
    • mukta mukta 26/08/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/06/2018
    • mukta mukta 26/08/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/06/2018
    • mukta mukta 26/08/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 12/06/2018
    • mukta mukta 26/08/2018

Leave a Reply