पर्यावरण

पर्यावरण
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खड्ग उठाए वो कौन है?
क्यों तू अब भी मौन है ।
प्रदूषण बन खर-दूषण
भेद रहा ये आवरण।
छिन्न-भिन्न पर्यावरण
प्राण लीलता वातावरण
मृत्यु की तू छोड़ शरण
क्रांति का तू कर वरण
जीवन तुम्हें है पुकारता !
वादों की टंकार छोड़ ।
कोशिशों की बांध डोर ।
अब तीर चढ़ा तू कर्म का
न भटक -न थक
तू बन सजग
बेधड़क तू बन जा वीर !
भविष्य की तू बन जा नींव ।।
।।मुक्ता शर्मा ।।

9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/06/2018
    • mukta mukta 06/06/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/06/2018
    • mukta mukta 06/06/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 06/06/2018
  4. mukta mukta 06/06/2018
  5. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 07/06/2018
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/06/2018
  7. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 08/06/2018

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