कविताओं को भावों में पिरो दिया।

चुप चुप रहे जब तक हम,
दुनिया ने हमको जीने न दिया।
हर दिन हर पल इन आँखों मे,
समुन्दर आंसुओ का भर दिया।
जख्मों को जब भी भरना चाहा,
जख्म पर नमक उड़ेल दिया।
दर्द की हर इंतेहा से गुजर कर,
दर्द को सहना सीख लिया।
जोश दिया फिर दर्द ने हमको,
चुप्पी को हमने तोड़ दिया।
गलत बात बर्दाश्त नहीं है,
इस बात पर हमनें मोल दिया।
दिल में थी जो भी बात हमारे,
सबके सम्मुख बोल दिया।
आत्मविश्वास जगा फिर मन में,
सच को कहने का हौसला मिला।
कलम को बनाकर अपनी ताकत,
कविताओं में भावों को पिरो दिया।
By:Dr Swati Gupta

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 01/06/2018
  2. rakesh kumar Rakesh kumar 31/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 01/06/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 01/06/2018
  4. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 31/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 01/06/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 31/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 01/06/2018
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/06/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 04/06/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 04/06/2018

Leave a Reply