कुंवारा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कवि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कुरेदो मत जवां दिल को, कुंवारा है दिवाना है
इसे गफलत में न पड़ने दो, तराना है याराना है।
छेड़ो मत अब दिल मेरा, ये हारा है या मारा है
खेल आप ना समझो, करारा है ये दिल दारा है।

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/05/2018

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