मेरा दर्द

हर दर्द को मैंने
कुछ ऐसे जी लिया
करता रहा फ़रियाद
मांगता रहा खुदा से मौत
खुदा ने ज़िन्दगी देकर
और भी तड़पा दिया

जो दर्द था सीने में
नासूर सा चुभा हुआ
उसे सीने से लगा लिया
अश्क तो बह ही चले थे आँखों से
मैंने अश्को को आँखों में ही ठहरा दिया
जज्बातो को खुद में ही दफना दिया

लोग अक्सर जलते थे मुझसे
मेरे मुस्कुराने पर
मैंने दर्द को भुलाने के लिए
दर्द को ही गुदगुदा दिया
दर्द जहाँ से,जैसे भी मिला
दर्द को अपना बना लिया

दर्द को जब भी उकेरा
कागज़ पर
दर्द ने कलम को भी रुला दिया
भरता गया पन्ने
और लिख ही दिया ज़िन्दगी
दर्द ने तो जीना ही सीखा दिया —अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 28/05/2018
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 28/05/2018

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