मुझे चुनो तुम…..

मुझे चुनो तुम, अगर तुम्हे इस भीड़ में एक खाली सा कोना रोने को मिले तो,
अगर नींद में डूब जाने का डर सताए, तो मुझे चुनो तुम.
अगर ये देख सकते हो की तुम धीरे धीरे ख़त्म हो रहे हो, तो तुम चुनो मुझे.
अगर तुम्हारे कदम बार बार रुकने से डरते हैं, और मंजिलो की फिक्र करते हैं,
तो तुम मुझे चुन सकते हो.
मुझे चुनो तुम , अगर बहुत अमीर हो फिर भी लगते हो बेबस आईने के सामने ,
हर रोज़ निकलते हो सफ़र पर फिर भी न हो सके अगर सफ़र के ,
और सब हासिल करने के बाद भी अगर डर का सूखा झोंका गुजरता है तुम्हारे खिड़की से,
तो फिर चुन लो मुझे.
ज़हन में अबतक नहीं पहुची हैं अगर जीवन की ध्वनियाँ,तो तुम मुझे चुनो.
तुम चुन लो मुझे , अगर नहीं करते कोई मदद अपनी और न ही दुसरों की,
अगर पसंद है अपनी आदतों की गुलामी और सिर्फ रात और दिन से ही है तुम्हारा वास्ता ,
तो तुम मुझे चुन लो.
अगर अरसा हुआ अपनी गलती माने हुए, और बारिश की चन्द बूँदें भी अब तुम्हे परेशान करतीं हैं,
अगर भूल गए हो अब हार के मज़े लेना, तो तुम मुझे चुन लो.
अगर तुम कर रहे हो छिपाने की कोशिश अपने रूह को, पहन कर हर रोज़ एक नया झूठ,
और अब भी हो अनजान अगर खुद से, तो करीब आओ और चुनो लो मुझे.

नितेश बनाफ़र(कुमार आदित्य)

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  1. rakesh kumar rakesh kumar 28/05/2018

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