तुम थाम लेना मेरा हाथ

जब आसमां में
कही कोई तारा
टूट रहा हो
जब चाँद अपनी चांदनी से
रौशनी बिखेर रहा हो
जब कही कोई
मंदिर में दीपक जला रहा हो
जब चिड़िया अपने
घोंसले में लौट रहा हो
जब शहर लम्बी चादर तान
गहरी नींद में सो रहा हो
तुम उस क्षण में
चलना मेरे साथ
थाम कर मेरा हाथ
तुम आसमां और जमीं के बीच
झुलना मेरे साथ ,मेले के झूले पर

पेड़ो से होकर बहती बसंती हवा
अपने शीतल झोंके से
जीवंत कर देगा उस पल को
और तुम्हारा मेरा वो क्षण
स्मिर्तियों में अमर हो जाएगा
वो पेड़ की छाल पर
गुदा हुआ तेरा मेरा नाम
स्मारक ही बन जाएगा प्रेम का
जिसे महसूस करने ,आयेंगे प्रेमी जोड़े
अपना प्यार पाने
प्यार के क्षण को पाने —अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 26/05/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 26/05/2018

Leave a Reply