समां

आते तो हैं लोग मिलने को मुझे

मुस्कुराहटों से अपनी छलने को मुझे

कहते हैं समां हूँ जिन्दगी की उनकी

छोड़ देते हैं दरवाजों पर पिघलने को मुझे

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/05/2018
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 24/05/2018
  3. rakesh kumar Rakesh kumar 24/05/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 25/05/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 25/05/2018
    • rakesh kumar Rakesh kumar 26/05/2018

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