नजरें – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कवि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

काश ये नजरें बदल जाती, प्यार में
झूठ का पर्दा उठता,बीच बाजार में।
भरोसा खुद पर, अगर नहीं हो आपका
तो फिर, क्या रखा है इस इंतजार में।
दिखावा अब मुझको,अच्छा नहीं लगता
क्या बताएँ, हम हंस दिये व्यवहार में।
वचन मीठे रहे तो, कोई बात बने
कड़वी हर बात लगती है, बुखार में।
आदमी सड़क का ही था,तो क्या हुआ
अपनी यह जिंदगी, लूटा दी उपकार में।
चमकती आँखों में, बिन्दु हया तो देख
उसे मत गिरा, बीच पानी की धार में।

हया – लज्जा (इज्जत)

6 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 22/05/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 22/05/2018
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/05/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 23/05/2018
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/05/2018
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/05/2018

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