इतना साथ निभा देना

यदि तुम मुझको जान सके हो
इतना साथ निभा देना
मेरे होने का आशय
दुनिया को समझा देना
मैं सक्षम पर वक़्त नही था
जो सम्मुख वह सत्य नही था
अंतस में जो पीर सिंधु था
जिसका तुमको ठौर पता था
अवसर जान उचित उपक्रम से
इक इक कण पिघला देना
यदि तुम मुझको जान सके हो

सीना तान खड़ा जो बाहर
भीतर रेंग रेंग कर चलता
ये कैसा पुरुषार्थ, योग है
घुटने टेक समर्पण करता
जो घृणित है जो निषेध है
जो अधर्म का अनुच्छेद है
ईश्वर की अवज्ञा करता
बार बार वह कृत्य उभरता
बंधा हुआ वह किसके वश में
चीख चीख कर गा देना
यदि तुम मुझको जान सके हो

मैं मिट्टी कच्ची गीली सी
देव मेरा एक कुम्हार था,
नही त्रुटि कोई संरचना में
न श्रम में कोई विकार था
जो तालीम मिली वंदन कर
संकल्पों का अभिनंदन कर
मैं नित जीवन प्रथा निभाती
टूट फूट कर फिर जुड़ जाती
मन का घट रिस रिस कर टूटा
किस कारण जीवन था रूठा
क्यों आघात सहन कर पाई
कुछ तो पता लगा लेना
यदि तुम मुझको जान सके हो।

वृक्ष स्वयं ही फल खायेगा
क्या ऐसा भी युग आएगा
नदिया नीर स्वयं पी जाये
गागर सागर नजर न आये
सीमाओं को तोड़ मोड़ कर
सृजन स्वयं सृष्टा बनता है
जीवन दूषित होकर प्रतिक्षण
मृत्यु की राहें तकता है
कब तक ईश्वर मौन रहेगा
कब तक यह तांडव ठहरेगा
मेरे भय की झलक समूची
मानवता को दिखला देना
यदि तुम मुझको जान सके हो
इतना साथ निभा देना

देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

10 Comments

  1. mukta mukta 21/05/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/05/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/05/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 22/05/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 22/05/2018
  6. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 22/05/2018
  7. davendra87 davendra87 22/05/2018
  8. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 22/05/2018
  9. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/05/2018
  10. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/05/2018

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