मंजिलें मुकाम पाती रही हूँ।।

नज़्म।।
उम्मीद के दीये जलाती रही हूँ,
तूफाँ में भी कश्ती चलाती रही हूँ।।
हौसले डगमगा नहीं सकते हैं मेरे,
विश्वास को मन में बढ़ाती रही हूँ।।
नहीं तोड़ सकती मुश्किले मुझको,
मुश्किलों को आईना दिखाती रही हूँ।।
नैनो से बहाकर नीर चुपके से,
दर्द को दिल में छुपाती रही हूँ।।
आहत न हो किसी अपने का दिल,
इसलिए सदा मुस्कुराती रही हूँ।।
प्यार को छतरी बनाकर यूँ ही,
अपनों को दर्द से बचाती रही हूँ।।
काँटो से भरी इस दुनिया में,
फूलों की बगिया बनाती रही हूँ।।
पथरीले राहों पर चलकर यूँ स्वाति,
मंजिलें मुकाम पाती रही हूँ।।
By:Dr Swati Gupta

12 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 20/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 21/05/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 21/05/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 20/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 21/05/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 21/05/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 21/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 21/05/2018
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/05/2018
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 21/05/2018

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