चश्मे का नंबर बढ़ा

चश्मे का नंबर बढ़ा !!
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बिन चश्मे का बचपन था
हर कोई दोस्त
हर कहीं अपनापन था।
ज्यों-ज्यों चश्मे का नंबर बढ़ा ।
त्यों-त्यों सच्चाई से पर्दा हटा ।
राजनीति का बुखार कुछ ऐसा बढ़ा।
पैनी नज़रें,चढ़ती भौंहें
और माथे पर तेवर है चढ़ा ।।
पहले चेहरे शीशे थे
अब पूछ कर भी शक करते हैं ।
सब ठीक, मज़े में सुन कर भी
बस शिकन की चाहत करते हैं ।
हम चाय का कप थमा जब
दोस्ती का दम भरते हैं ।
वो धर्म की मक्खी देख
चाय पीने से डरते हैं ।
।।मुक्ता शर्मा ।।

12 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/05/2018
    • mukta mukta 19/05/2018
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 19/05/2018
    • mukta mukta 19/05/2018
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 20/05/2018
    • mukta mukta 04/06/2018
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/05/2018
    • mukta mukta 04/06/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 21/05/2018
    • mukta mukta 04/06/2018
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/05/2018
    • mukta mukta 04/06/2018

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