हूल का आग जला

जब छीन
उजाड़ रहे थे
लोगों की घर,आंगन
कपड़े-लत्ते
हरियाली जंगल
खेत-खलिहान
और मिट्टी के अंदर की पानी
तब हूल का आग जला
काला धुँआ निकला
आसमान की ओर

जब छीन रहे थे
विकास के नाम पर
लोगों की हक़ और अधिकार
जब कुचल रहे थे गाड़ी से
निर्धन-गरीब लोगों को
चौड़ी सड़क पर,
सब कुछ खोकर
भाग रहे थे लोग
आँसू से छाती
भींगा रहे थे
तब हूल का आग जला
और काला धुँआ निकला
आसमान की ओर

जब लोगों को
मार रहे थे
लाल खून गिरा रहे थे
धरती पर
जब लोगों को
जात के नाम पर
धर्म के नाम पर
बाँट रहे थे
तब हूल का आग जला
और काला धुँआ निकला
आसमान की ओर.

*हूल एक संताली शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ क्रांति होता है

10 Comments

  1. davendra87 davendra87 12/05/2018
    • chandramohan kisku Chandramohan Kisku 12/05/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2018
    • chandramohan kisku Chandramohan Kisku 12/05/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 12/05/2018
    • chandramohan kisku Chandramohan Kisku 12/05/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 14/05/2018
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 15/05/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 14/05/2018
    • chandramohan kisku chandramohan kisku 15/05/2018

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