एक की ख़ामोशी भी खलती है – अनु महेश्वरी

गलत या सही मापने का कोई पैमाना नहीं,
पर मुश्किल होती, जब सिमित रख दायरा,
अपनी समझ को ही, सब बस माने है सही।

सब कुछ अपने हिसाब से हो यह जरुरी नहीं,
किसी और पे अपनी ही बाते क्यों लागु करनी,
कभी कभी ध्यान दे और सुने औरो की कहीं।

एक की ख़ामोशी भी, खलती है कभी कभी,
अपनी हंसी से चारो तरफ फैलाए थोड़ी खुशी,
खुशनुमा माहौल है, तो खुश रहेंगे यहाँ सभी।

अनु महेश्वरी
बेंगलुरु

8 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 11/05/2018
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 17/05/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2018
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 17/05/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 14/05/2018
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 17/05/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 14/05/2018
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 17/05/2018

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