फौलाद की औलाद

बचपन की कलियों की खिलने की कहानी

हर साँस में बहकी एक उम्मीद रूमानी

लिए बहारें आई फिर मदहोस जवानी

शुरू हो गयी फिर बहकने की कहानी

आज जरूरत नहीं भाई की मजबूत बाँहों की

आज जरुरत बस माशूक की नर्म निगाहों की

आज बन गई जिंदगी छाया मस्त अदाओं की

एक पल में जलती होली वर्षों लगी आशाओं की

हम हैं युवा इस राष्ट्र के और हैं बड़े जागरूक

हर फैशन के दीवाने हम और बगल में है माशूक

विश्वशांति के पुजारी चला लेते हैं गोली बन्दूक

आओ सीखो हमसे एकता का एक नया सलूक

नाईट क्लबों में थिरकती है आज जवानी

गर्म गोस्त के के साथ चलती शराब दिवानी

कहाँ है हिन्दुस्तान कहाँ है इसकी जवानी

फौलाद की औलाद बन गई बहता हुआ पानी

3 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 11/05/2018
  2. davendra87 देवेंद्र प्रताप वर्मा"विनीत" 12/05/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 14/05/2018

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