बेरूप

हे मालिक हमने क्या गुनाह किया

क्यूँ हमें खूबसूरत बना दिया

तेरे इस रूप ने उस रूप को छिपा दिया

जिसे पूजता है इंसानियत का दिया

रूपों के तेरे उस रूप की चाहत है मुझे

उस पर पड़ने वाली तेरी धुप की चाहत है मुझे

जो आहत ना हो उस सुख की चाहत है मुझे

जिसमे सच्ची राहत हो उसकी चाहत है मुझे

क्यों लगा दिए तूने कांटे हसीन कलियों में

क्यों बिकता है तेरा रूप रंगीन गलियों में

क्या कमी रह गई थी इस कमसीन दुनिया में

रूपवान बनाई दुनिया बेरूप इंसान दुनिया में

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