सकल सौगात हो – शिशिर मधुकर

दो दिल जहाँ नज़दीक हों और खुल के मन की बात हो
वो पल अगर तुम थाम लो हरदम सुहानी रात हो

झुलसा सा तन उलझा सा मन और तुम कहीं से आ गए
नभ में घटाएं छा गईँ कैसे ना अब बरसात हो

ओस से भीगा समां और ठंडी ठंडी ये सुबह
तुम ढली जाती हो मुझपे ज्यूँ महकता पारिजात हो

प्यार का गुल खिल गया तो फिर ये मुरझाता नहीं
चाहे मुकद्दर साथ ना दे और कठिन हालात हो

जब चुन लिया मधुकर तुम्हें तो और कुछ ना चाहिए
अब तुम ही हो जीवन मेरा और सकल सौगात हो

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. Abhishek Rajhans 10/05/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2018
  2. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/05/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 10/05/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/05/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/05/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2018
  6. davendra87 davendra87 12/05/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 12/05/2018

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