सरहद का पत्थर

बड़ा ही बेजान सा हूँ मैं

दो देशों के बीच खड़ा हूँ मैं

मैं हूँ सरहद का पत्थर

चुपचाप सहता हूँ मैं

गवाह हूँ मैं नफरत का

दोनों तरफ के इंसानो का

गश्त करती चालों का

रक्त भरे जमानो का

मैं गवाह हूँ अंहकार का तेरे

तेरे तीर कमानों का

और गवाह हूँ कटकर गिरी

गर्दनों के शमशानों का

मैं सालों से खड़ा अकेला

क्यूँ ये नफरत फैलाते हो

मैं किसी का नहीं हुआ

क्यूँ अपनी जान गवाते हो

6 Comments

  1. chandramohan kisku Chandramohan Kisku 09/05/2018
  2. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 09/05/2018
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/05/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 09/05/2018
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 09/05/2018
  6. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 09/05/2018

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