गुलमोहर

यूँ किनारे खड़े रहकर
देखते हो क्या
बताओ गुलमहर।

लपक पड़ते हो
किसी गठरी उठाये
यात्री पर।
देह पर झन्ना लपेटे
किसी पगली
धात्री पर।
सहन का संदेश देते
बोलते हो क्या
बताओ गुलमहर।

स्वार्थी जन तोड़ देंगे
फूल पत्ते
और शाखें।
और फिर उपदेश देंगे
जड़ों में
करके सुराखें।
किस तरह निपटोगे इनसे
सोचते हो क्या
बताओ गुलमहर।

इस धरा पर
शांति बरसे
प्राणियों हित प्रार्थनाएँ।
आग को ओढ़े
हुए तुम
सह रहे नित यातनाएँ।
कर रहे विश्वास किन पर
जानते हो क्या
बताओ गुलमहर।

11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/05/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 08/05/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 08/05/2018
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 08/05/2018
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 09/05/2018
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 09/05/2018

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