तेरे काबिल

इस तन्हा जंगल में

महुऐ सा खिलता हूँ मैं

अक्स से तुम्हारे बनी घाटी

रोज आकर मिलता हूँ मैं

कहीं तो मिले ठिकाना

कोहरे बिखरता हूँ मैं

आँखों में ढूढ़ता मंजिल

मीलों रोज निकलता हूँ मैं

बनाने को तेरे काबिल

मोम सा पिघलता हूँ मैं

ज़िंदा होता हूँ तुम्ही से

तुम्हीं पर रोज मरता हूँ मैं

11 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/05/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 06/05/2018
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 07/05/2018
  4. chandramohan kisku Chandramohan Kisku 07/05/2018
    • rakesh kumar rakesh kumar 07/05/2018
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/05/2018
  6. rakesh kumar rakesh kumar 07/05/2018
  7. Abhishek Rajhans 07/05/2018
  8. Sandeep yadav 08/05/2018
  9. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/05/2018
  10. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 08/05/2018

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