मिसाल

सारा जहान तुझमें, तू क्यूँ भटक जाता है

खुले आसमान का पंछी क्यूँ अटक जाता है

कोई ख़ुशी बाहर नहीं है तुझसे

चल संम्भल क्यों तू मचल जाता है

जोड़ एक से एक देख एक योग बना

टेक कदम एक एक यूँ न मोड़ बना

चलता चल पल पल चलने का ले मजा

बेवफा आज से कल का मुकाम बना

खोद नींव गहरी की कल रोना न पड़े

बना बनाया मकान हाथ से खोना न पड़े

खड़ा है क्यों रख पहला पत्थर आज ही

रखता चल जब तक सांस से सांस लड़े

पशीने की बूँद तेरी खुशबू पैदा करती है

अन्दर से मरे हुओं को फिर जिन्दा करती है

छोड़ आज को कल के नाम पर ,देख

आज की कुर्बानी कल की मिसाल बनती है

5 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 05/05/2018
  2. rakesh kumar Rakesh kumar 06/05/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/05/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/05/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 08/05/2018

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