सुशोभित

शीतल जल में कुछ है

मीठे से फल में कुछ है

कुछ है जो दिखता नहीं

खरीदूं पर बिकता नहीं

कुछ है जो डर में

कुछ है भीतर में

है कुछ जो सिमटता नहीं

कुछ है जो बिखरता नहीं

कुछ स्पस्ट में कुछ धूमिल में

कुछ निश्छल में कुछ अविरल में

कुछ मिलता है ऊंचे गगन में

कुछ छिपा पुलकित नयन में

कुछ आईने में भी नहीं दिखता है

कुछ कोठरी में भी नहीं छुपता है

कुछ टूटकर भी नहीं झुकता है

कुछ बिना बेचे ही बिकता है

कुछ भूखी किलकारियों में

कुछ हाथी की सवारियों में

कुछ केसर की क्यारियों में

कुछ उठती चिंगारियों में

कुछ निर्मल कुछ कलुषित

कुछ पुष्प कुछ कुपोषित

कोई शिरोमणि है जग का

रग रग जिससे है सुशोभित

9 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 04/05/2018
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 04/05/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 04/05/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 04/05/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/05/2018
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/05/2018
  7. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/05/2018
  8. davendra87 davendra87 07/05/2018
  9. rakesh kumar rakesh kumar 07/05/2018

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