दोहन

कायाकल्पित किंगरों से

अब युद्ध नहीं होगा

दूध और फूल चढाकर

शिव अभिषेक नहीं होगा

ना कोई समभाव प्रबल

कोई कबूतर सफ़ेद नहीं होगा

ना मंजूर अत्याचार दखल

कोई मतभेद नहीं होगा

जब होगा तांडव प्रखर

पर्वत भी थर थर कापेंगे

बेशक रंगबदल नतमस्तक

जीवन की भीख मांगेगे

बर्फ की शिलाओं से जब

शोले रण में बरसेंगे

अपनी माँ की छाती को

लाल तुम्हारे तरसेंगे

जब मग्न महादेव की

त्रिज्योति खुल जाएगी

आहत होगी धरती भी

मौत तुम्हारी आयेगी

दोहन होगा पुण्यभूमि पर

फिर इतिहास दोहराया जायेगा

मातृभूमि को झुकाने वाला

हर गिरगिट मारा जायेगा

7 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 03/05/2018
  2. mukta mukta 03/05/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/05/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 04/05/2018
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/05/2018
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/05/2018
  7. rakesh kumar Rakesh kumar 06/05/2018

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