अंश का दंश

काट कर फेंक दिया

कूड़े में जैसे सामान को

अपने मतलब को किया

कुर्बान नन्ही जान को

होता कौन है तू मेरी

मौत का फैंसला करने वाला

बेदर्द लगता है तुझे

नहीं कोई देखने वाला

छिपाकर कायर सा मुहँ

तू कैसे जी पायेगा

एक दिन तू भी मेरे

लहू का कर्ज चुकाएगा

उस भूमि पर कभी भी

ना खुशहाली आती है

जिस जमीं पर काटकर

बेटी डाली जाती है

धात्री वो धरा धुरी पर

पग पग पर खड़ा है कंश

बहुत गहरा लगेगा

तेरे इस अंश का दंश

7 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 02/05/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 02/05/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 02/05/2018
  4. davendra87 davendra87 02/05/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 03/05/2018
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/05/2018
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 03/05/2018

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