लिखता रहूँगा नाम तेरा

दिन भर
गलियों में घूमेंगे
तेरी याद की गठरी लेकर…

रात रात भर
करवट बदलता रहूँगा
तेरे इंतजार की तपिश सह कर …

हर सुबह
तकता रहूँगा दरवाजे को
कलश में चावल डाल कर …

हर रोज
पता मांगूंगा तुम्हारा रब से
हाथों में तेरी तस्वीर ले कर …

हर सुबह
बनाता रहूँगा चाय तुम्हारे लिए भी
पीता रहूँगा ठंडी कर…

कभी पेड़ की छाल पर
कभी पत्थर की दीवार पर
लिखता रहूँगा नाम तेरा
अपने खून की स्याही बना कर… अभिषेक राजहंस

4 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 27/04/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 28/04/2018
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 28/04/2018
  4. davendra87 davendra87 28/04/2018

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