चल चलें दिल कोई जंगल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

कैसे कहदें तेरी गलियों से निकलना जो हुआ…
आँखों से ख़्वाबों का एक पल में फिसलना जो हुआ…

चरमराती हुई दिवारों को क्या देख रहे हो…
वायु पानी धरती आकाश का सिमटना जो हुआ…

हर तरफ जीस्त की राहें क्यूँ अँधेरी है यहां…
आग अपनी से यूं सूरज का ही जलना जो हुआ…

जान अपनी भी निकल जायेगी यूं ही एक दिन…
रोज़ रुस्वा हो तेरी बज़्म से निकलना जो हुआ….

ये जहां अपना नसीबा तो कभी होगा नहीं…
पल में आँसू पल में शोलों का भड़कना जो हुआ…

मैं नहीं तूही ख्याल मेरा और वजूद भी, ‘चन्दर’..
आज़माना तू मुझे तेरा संभलना जो हुआ….

चल चलें दिल कोई जंगल कुछ जहां सुकूँ तो मिले…
‘दामिनी’ रोज़ नए रूप यहाँ कुचलना जो हुआ…

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/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/04/2018
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 24/04/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/04/2018
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 24/04/2018
  3. कृष्णा पाण्डेय Krishna121 23/04/2018
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 24/04/2018
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/04/2018
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 24/04/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 24/04/2018
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 25/04/2018
  6. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 26/04/2018
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 27/04/2018
  7. davendra87 davendra87 28/04/2018
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 01/05/2018
  8. rakesh kumar Rakesh kumar 17/05/2018
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 21/05/2018

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