मुहब्बत का असर – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की ख़ुशबू जब मेरी सांसों में रहती थी
मेरा चेहरा चमकता था खुशी नस नस में बहती थी

सभी ग़म भूल कर यारों सदा जीने की इच्छा थी
मुहब्बत का असर देखो मुझे दुनिया ये कहती थी

बड़े शिकवे गिले थे मुझको भी अपने परायों से
मगर जब तुम मिले दीवार ओ दर नफ़रत की ढहती थी

गवाह तारीख़ है जग में सुनो उल्फ़त की ताकत की
ख़त्म ये हो नहीं पाई सदा जुल्मों को सहती थी

गुज़र जाएगा ये जीवन समझ फिर ये ही आएगा
जिसको भूला ज़माने नें वो मुहब्बत ही महती थी

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 23/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/04/2018
  2. कृष्णा पाण्डेय Krishna121 23/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/04/2018
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/04/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 24/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/04/2018
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/04/2018
  6. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 26/04/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir 29/04/2018

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