बुलबुल-ऐ-चमन – डी के निवातिया

बुलबुल-ऐ-चमन

*

कफ़स-ऐ-क़ज़ा में कैद बुलबुल-ऐ-चमन अपना है
बनाएंगे जन्नत-ऐ-शहर इसे लगे बस ये सपना है
फ़िक्र किसे मशरूफ सब अपनी बिसात बिछाने में
नियत में ,राम-राम जपना पराया माल अपना है !!

***

डी के निवातिया

_

कफ़स = पिंजरा, शरीर,जाली
क़ज़ा= भाग्य, अधिकारस्क्षेत्र, किस्मत भरोसे
मशरूफ = काम में लगा हुआ, संलग्न

 

12 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 21/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/05/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/05/2018
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/05/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 22/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/05/2018
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/05/2018
  6. md. juber husain md. juber husain 01/05/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/05/2018

Leave a Reply