साहित्य परिवार का साथ (एक,दो) Bhawana Kumari

मैं भी लिखती हूँ कुछ
मन में आए विचारो को
कलम की ताकत बनाकर ।
मंजिल मेरी कहा है
बस उसका हमें पता चाहिए।
खुद ही रास्ते पर चली आऊंगी
बस “‘निवातिया’,’मधुकर’,’बिन्दु’,
मधु,’मनी’,’अभि’जी ”
सा कोई राह numa चाहिए।
2) बहुत बुनी हूँ मैं ताना बाना

हृदय भी व्यथित हो गया है

बहुत थकी हूँ भटकी हूँ मैं

टूट चुकी हूँ मैं पूरी तरह से।

राह की हर कठिनाई पार कर
अब “‘अंजलि ‘,’बब्बू ‘,’अरूण’,
‘किरण’,’कपिल ‘,’विमल’,’सोनी’जी ”
जैसे श्रेष्ठजन का साथ मिला है।

10 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/04/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 21/04/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/04/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 21/04/2018
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 21/04/2018
    • Bhawana Kumari Bhawana Kumari 21/04/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 21/04/2018
  5. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 21/04/2018
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/04/2018
  7. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 22/04/2018

Leave a Reply