क्षणिक

जवाब सीधा है सरल है
पीछे कई कठिन सवाल है
क्षणिक जो भी है
एक लंबा संघर्ष है अंतराल है
मुस्कुराहटें
जो प्रतिमान हैं
दिव्यता की पहचान हैं
अंतस में समेटे हैं
पीड़ा के कई महासिंधु
यूँ ही नही है
ज्योतिर्मय मधुमय मुख-बिंदु।

देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

6 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 17/04/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 18/04/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/04/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 19/04/2018
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/04/2018
  6. davendra87 davendra87 20/04/2018

Leave a Reply