ख्याल बदलिए – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ये दुनिया धन के लिये रोती बहुत है
पाने के ख्याल में सोचती बहुत है।
किस किस को क्या क्या समझाये अब हम
ले जाना नहीं पर बटोरती बहुत है।

टुकड़ों से बने और टुकड़ों में बिखर गये
कितने तो जिंदा रहे और कितने मर गये।
गुमान में रहना भी अब रास आया नहीं
कितने संहल गये और कितने ही डर गये।