नादानियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

याद आने लगे हैं वो यादों के पल
कुछ ख्यालों में आ गया बीता जो कल।

अब तो तन्हा भी रहना गवारा हुआ
इश्क मुहब्बत का कैसा देखो ये फल।

अब नजरें संहालो नयन वश में करो
ये धोखा तेरा है जो करता है छल।

जो नादानियांँ है उसको वश में करो
वर्ना मारी जायेगी तेरी भी अकल ।

ये क्या हो गया जो हम भी फंस गये
इश्क ऐसे में हम भी हो गये थे कतल ।

अक्सर धोखा ही मिलता उलझ जो गये
अब दिखता कहाँ जो इसमें होता सफल।

5 Comments

  1. davendra87 davendra87 17/04/2018
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 19/04/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/04/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 19/04/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 19/04/2018

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