एक मुक्तक : न हो अब दिल्लगी दिल से…

दिखा प्रतिबिम्ब दर्पण में सहज यह भाव आया है.
तुम्हारा साथ ऐ साथी हमारे मन को भाया है.
समर्पित भावना हो यदि शिकायत ही कहाँ होगी,
न हो अब दिल्लगी दिल से जहाँ सब कुछ लुटाया है..
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रचनाकार: इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/04/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 17/04/2018

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