उफ़ ! यह दोगलापन ! ( हास्य-व्यंग्य कविता)

हाथी के दांत हैं ,
दिखाने के ओर ,
खाने के ओर .

और व्यवहार है ऐसा ,
कथनी है ओर ,
करनी है ओर .

इन सियासतदारों की मत पूछिए ,
इनके इस चेहरे के पीछे ,
चेहरे है कई ओर .

योजनायें ,नारे और भाषण ,
भाषणों में लुभावने आश्वासन .
सब है खोखले और असत्य .
ज़ाहिर तौर पर इनकी हकीक़त
है कुछ ओर .

कई वर्षों से सुनते आ रहे हैं ,
”बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ो ” नारा.
मगर नारियां और बच्चियां अब भी
असुरक्षित और प्रताड़ित .
कौन जाने इस नारे की हकीक़त है
कुछ ओर .

इस पुरुष सत्तात्मक समाज में ,
सरकार चलाने वाले भी तो पुरुष ही हैं.
भला इन दोगले पुरुष समाज में ,
इन्साफ पाने नारी बेचारी जाये किस और ?

नारियों और बच्चियों के प्रति ,
पुरुष समाज की सोच तो अब तक बदली नहीं,
फिर कैसे उम्मीद करेंगे भविष्य में ,
उनके बेहतर ,सुरक्षित व् सम्मानिये जीवन की ,
कम होने के बजाये नारी विषयक अपराध ,
दिनों -दिन बढ़ते जा राहे है और तो और .

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 17/04/2018

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